उत्तराखंड

तिलवाड़ा में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर उठे सवाल, बुलडोजर कार्रवाई में भेदभाव के आरोप

रुद्रप्रयाग:  केदारनाथ हाईवे पर स्थित तिलवाड़ा में चल रही अतिक्रमण हटाओ मुहिम अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। जहां एक ओर प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई को तेज और प्रभावी बता रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रसूखदारों और सत्ताधारी नेताओं से जुड़े लोगों के अतिक्रमण पर नरमी बरती जा रही है, जबकि सामान्य और गरीब लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि वर्षों से कुछ प्रभावशाली लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर रखा है। यहां तक कि सरकारी मुआवजा लेने के बाद भी दोबारा अतिक्रमण किया गया, लेकिन विभागीय अभियंताओं और प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

सूत्रों के मुताबिक, कुछ तथाकथित जनप्रतिनिधियों और सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों को संरक्षण दिए जाने की चर्चा क्षेत्र में तेज है। एनएच खंड और तहसील प्रशासन के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिलाधिकारी और एनएच के अधिशासी अभियंता बदलते रहे, लेकिन कार्रवाई के तरीके में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला।

नवनियुक्त जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने हाल ही में तिलवाड़ा में अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। हालांकि, जमीनी स्तर पर भेदभाव के आरोपों के चलते क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई करनी है तो सभी के खिलाफ समान रूप से की जाए, न कि पहचान और प्रभाव के आधार पर।

इस बीच जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि तिलवाड़ा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने स्वयं अतिक्रमण हटाने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, लेकिन क्षेत्र में लोगों की नाराजगी अभी शांत नहीं हुई है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

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