
देहरादून। उत्तराखंड में इस वर्ष चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं अब नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के नए दिशा-निर्देशों के तहत संचालित की जाएंगी। केदारघाटी सहित चारों धामों के लिए हवाई यात्रा पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया और सख्त नियमों के दायरे में होगी। इसके लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
पहली बार तय होंगे विशेष कॉप्टर-रूट्स
मानवीय चूक और दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने के उद्देश्य से उत्तराखंड में पहली बार विशेष कॉप्टर-रूट्स निर्धारित किए जा रहे हैं। भविष्य में सभी हेलीकॉप्टरों को इन्हीं निर्धारित रूट्स पर उड़ान भरना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही घाटियों में उड़ान भरने वाले प्रत्येक हेलीकॉप्टर की लाइव लोकेशन ट्रैकिंग के लिए अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे उड़ानों की पल-पल निगरानी संभव हो सकेगी।
उड़ानों में 30 प्रतिशत तक कटौती
भीड़ नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस बार हेलीकॉप्टर टिकटों की संख्या में 30 प्रतिशत तक कटौती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सीमित संसाधनों के बीच सुरक्षित और नियंत्रित संचालन सुनिश्चित करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
क्या होते हैं कॉप्टर-रूट्स
कॉप्टर-रूट्स हेलीकॉप्टरों के लिए विशेष रूप से निर्धारित उड़ान पथ होते हैं। ये मुख्य रूप से घाटी क्षेत्रों में विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) के तहत उपयोग किए जाते हैं।
इन रूट्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कम ऊंचाई वाले और सीमित हवाई क्षेत्रों से बचते हुए सुरक्षित दिशा में उड़ान संभव हो, जिससे टकराव और दुर्घटनाओं का खतरा कम हो जाता है।
हेलीपोर्ट्स पर सख्ती, DGCA लाइसेंस अनिवार्य
सहस्रधारा, केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे प्रमुख हेलीपोर्ट्स को अब DGCA के लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क के तहत लाया जाएगा। यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए प्रमुख हेलीपैडों पर पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग (PTB) का निर्माण किया जाएगा।
इसके अलावा खराब मौसम या तकनीकी खराबी की स्थिति में सुरक्षित लैंडिंग के लिए विभिन्न स्थानों पर इमरजेंसी हेलीपैड भी विकसित किए जा रहे हैं।
चारधाम यात्रा के दौरान हेली सेवाओं में किए जा रहे ये बदलाव यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ आपात स्थितियों में त्वरित और प्रभावी प्रबंधन की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।



