
देहरादून। केंद्र सरकार के आम बजट में कार्बन कटौती को लेकर किए गए प्रावधानों से उत्तराखंड को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। चारधाम यात्रा मार्ग पर ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ होगा, शहरी क्षेत्रों में ई-बस संचालन सेवा और मजबूत होगी तथा ग्रामीण इलाकों में बायोगैस उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी।
ईवी योजना से बदलेगी परिवहन व्यवस्था
उत्तराखंड में लागू ईवी पॉलिसी 2023 के तहत अभी तक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर तक सीमित है। बजट 2026-27 के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसें और ई-टैक्सी मॉडल शुरू किए जा सकेंगे। इससे चारधाम यात्रा के दौरान ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर विकसित होगा और प्रदूषण में कमी आएगी।
स्थानीय युवाओं के लिए ईवी सर्विसिंग, चार्जिंग स्टेशन और मेंटेनेंस नेटवर्क में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सीएनजी सस्ती, किसानों की कमाई बढ़ेगी
बजट में सीएनजी में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) मिक्स करने की योजना को शामिल किया गया है। सीबीजी को एक्साइज ड्यूटी से अलग रखने से देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और कोटद्वार जैसे शहरों में सीएनजी सस्ती होगी।
राज्य के 60 प्रतिशत से अधिक गांव पशुपालन पर निर्भर हैं। गोबर, कृषि अपशिष्ट और बायोवेस्ट के उपयोग से किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर खरीद मॉडल और बायोमास आधारित माइक्रो-पावर प्लांट्स लगाए जा सकेंगे।
कार्बन कैप्चर और सोलर एनर्जी पर फोकस
बजट में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हरिद्वार-रुद्रपुर औद्योगिक क्लस्टर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसे लागू किया जा सकता है। वहीं, आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान रिसर्च और टेस्टिंग हब बन सकते हैं।
सौर ऊर्जा के लिए बजट में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी से उत्तराखंड में रूफटॉप और फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स को नई गति मिलेगी।



