
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है। शासन की ओर से मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी की गई।
विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में मदरसा बोर्ड को खत्म करने से संबंधित विधेयक पारित किया गया था। इसके तहत आगामी एक जुलाई से राज्य की सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अधीन किया जाएगा। इन संस्थाओं की मान्यता की प्रक्रिया अब उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार गठित प्राधिकरण में डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अन्य सदस्यों में प्रो. राकेश जैन, डॉ. सैयद अली, प्रो. पेमा तेनजिन, डॉ. एल्बा मेड्रिले, प्रो. रोबिना अमन, प्रो. गुरमीत सिंह, राजेंद्र बिष्ट और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट शामिल हैं। इसके साथ ही महानिदेशक-विद्यालयी शिक्षा, निदेशक-राज्य शैक्षिक अनुसंधान तथा निदेशक-अल्पसंख्यक कल्याण भी प्राधिकरण के सदस्य होंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मदरसा बोर्ड अब बीते समय की बात हो गई है। अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण यह तय करेगा कि अल्पसंख्यक बच्चों को किस प्रकार की शिक्षा दी जाएगी। सिलेबस निर्धारण की जिम्मेदारी भी इसी प्राधिकरण के पास होगी।
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना और गुणवत्ता में सुधार करना है।



