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गुरु-शिष्य परम्परा संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राएँ शामिल हुएर संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को किया गया जागरूक

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, हाथीबड़कला में भारतीय शिक्षण मंडल और शैल कला समिति का संयुक्त आयोजन

देहरादून, 23 जुलाई:

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, हाथीबड़कला में भारतीय शिक्षण मंडल एवं शैल कला एवं ग्रामीण विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में “गुरु-शिष्य परंपरा पर संवाद” कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और गुरु की महत्ता के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांतीय पदाधिकारी स्वामी एस. चन्द्रा और विद्यालय की प्रधानाचार्या द्वारा महर्षि वेदव्यास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परम्परा के महत्व और उसकी प्रासंगिकता पर विस्तृत जानकारी दी गई।

स्वामी एस. चन्द्रा ने बताया गुरु का महत्व

मुख्य वक्ता स्वामी एस. चन्द्रा ने गुरु पूर्णिमा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बताते हुए कहा,

“गुरु हमारे जीवन के वास्तविक पथ-प्रदर्शक होते हैं। वे न केवल हमें ज्ञान देते हैं, बल्कि हमारी बुद्धि, सोच और आत्मिक उन्नति में भी मार्गदर्शन करते हैं। बिना गुरु के जीवन अधूरा है।”

उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा एक ऐसा दिन है जब हम अपने गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और उनके योगदान को स्मरण करते हैं। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से अपील की कि वे गुरुओं के आदर्शों को अपनाकर जीवन में आगे बढ़ें।

विद्यालय की प्रधानाचार्या ने भी साझा किए विचार

विद्यालय की प्रधानाचार्या ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति जुड़ाव देने का कार्य करते हैं। उन्होंने इस आयोजन को विद्यालय के लिए शैक्षणिक और नैतिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी बताया।

छात्र-छात्राओं ने भी लिया उत्साह से भाग

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। वे गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना से ओत-प्रोत दिखे। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल पारंपरिक गुरु-शिष्य संबंधों की जानकारी दी गई, बल्कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भी गुरु की भूमिका को रेखांकित किया गया।

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