
देहरादून, 25 अगस्त: उत्तराखंड कांग्रेस ने राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लापरवाही और हालिया पंचायत चुनावों में कथित वोट चोरी के मामलों को लेकर 26 अगस्त को राजभवन कूच का ऐलान किया है। पार्टी ने इसे “जनहित के मुद्दों पर निर्णायक लड़ाई” बताया है।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने शनिवार को प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में कानून का राज समाप्त हो गया है और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि:
“महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भाजपा नेताओं का नाम सामने आना आम हो गया है। अंकिता भंडारी केस से लेकर हाल ही में हरिद्वार में हुई मासूम बच्ची से दरिंदगी तक, भाजपा ने केवल निष्कासन पत्र देकर खानापूर्ति की है।”
धस्माना ने दावा किया कि पौड़ी के जितेंद्र सिंह सुसाइड केस में हिमांशु चमोली जैसे लोगों को सत्ताधारी दल का खुला समर्थन प्राप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के भांजे के साथ करोड़ों की ठगी और फिर आत्महत्या की धमकी जैसे मामले प्रदेश में अराजकता की स्थिति को दर्शाते हैं।
पंचायत चुनावों में खुलेआम गुंडागर्दी
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि नैनीताल और बेतालघाट में हुए पंचायत चुनावों के दौरान पुलिस की मौजूदगी में ही हथियार लहराए गए, अपहरण और गोलीबारी हुई। उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य को बिहार और यूपी जैसे हालातों की ओर धकेल रही है।
आपदा प्रबंधन पर भी उठाए सवाल
राज्य में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से उत्पन्न आपदा की स्थिति पर धस्माना ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा:
“धराली, हर्षिल, उत्तरकाशी जैसे इलाकों में भारी तबाही हुई है, लेकिन सरकार अभी तक आंकड़े भी स्पष्ट नहीं कर पाई है। यात्रा मार्गों और संपर्क सड़कों की बहाली बेहद धीमी है।”
26 अगस्त को कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन
कांग्रेस ने ऐलान किया है कि 26 अगस्त को देहरादून स्थित राजभवन का घेराव किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के सभी बड़े नेता भाग लेंगे, जिनमें शामिल हैं:
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करन माहरा (प्रदेश अध्यक्ष)
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हरीश रावत (पूर्व मुख्यमंत्री)
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यशपाल आर्य (नेता प्रतिपक्ष)
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प्रीतम सिंह (पूर्व अध्यक्ष)
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गणेश गोदियाल (वरिष्ठ नेता)
उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में हलचल मचना तय माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राजभवन कूच के दौरान कांग्रेस अपने जनमुद्दों को किस हद तक सामने रख पाती है और सरकार की प्रतिक्रिया क्या होती है।