
देहरादून, 20 अगस्त 2025 – राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा पाखरो टाइगर सफारी प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने खुद को CBI और ED से क्लीन चिट मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि CBI द्वारा कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र में उनका नाम शामिल नहीं है, जो उनके निर्दोष होने का सबूत है।
हरक सिंह रावत ने क्या कहा?
हरक सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“पाखरो सफारी मेरा सपना था, है और रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट पर कभी रोक नहीं लगाई। मैंने इसे सही इरादे से शुरू किया था, लेकिन कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ के चलते मुझे फंसाने की साजिश रची।”
उन्होंने कहा कि सीबीआई की चार्जशीट में उनका नाम नहीं है, जबकि कई अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। इससे साफ है कि उनकी कोई आपराधिक भूमिका नहीं थी।
क्या है पाखरो टाइगर सफारी प्रोजेक्ट?
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वर्ष 2019 में तत्कालीन बीजेपी सरकार ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की पाखरो रेंज में टाइगर सफारी निर्माण का प्रस्ताव रखा।
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उस समय हरक सिंह रावत राज्य के वन मंत्री थे।
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परियोजना के तहत 106 हेक्टेयर वन भूमि पर टाइगर सफारी बनाई जानी थी।
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शुरुआत में दावा किया गया कि केवल 163 पेड़ों की कटाई होगी, लेकिन जांच में 6,903 पेड़ कटे होने की पुष्टि हुई।
कैसे सामने आया मामला?
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वन्यजीव कार्यकर्ता गौरव बंसल ने इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में उठाया था।
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2021 में NTCA (National Tiger Conservation Authority) ने एक कमेटी गठित कर जांच की और 22 अक्टूबर 2021 को रिपोर्ट सौंपी।
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रिपोर्ट में विजिलेंस जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
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इसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और Forest Survey of India (FSI) से जांच करवाई।
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FSI की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ कटान की पुष्टि हुई।
CBI और ED की जांच के बाद क्या हुआ?
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CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में लंबी पूछताछ और जांच की।
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जांच पूरी होने के बाद CBI ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें हरक सिंह रावत का नाम शामिल नहीं है।
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हरक सिंह रावत के अनुसार, यही उनके निर्दोष होने का प्रमाण है।
राजनीतिक बयान और भविष्य की योजना
हरक सिंह रावत ने दावा किया कि अगर राज्य में कांग्रेस की सरकार आती है, तो वह इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू कर गढ़वाल के विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगे। उन्होंने कहा:
“ये प्रस्ताव केवल टाइगर सफारी नहीं, बल्कि गढ़वाल के पर्यटन और रोजगार का भविष्य है।”
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