
देहरादून | 26 अगस्त 2025
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सोमवार को सचिवालय में कार्बन क्रेडिट के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए कार्बन क्रेडिट न केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नया अवसर भी है।
पर्यावरण विभाग को बनाया जाएगा नोडल विभाग
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में पर्यावरण विभाग को कार्बन क्रेडिट के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्यभार सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा “उत्तराखंड के किसान और स्थानीय समुदाय कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं और उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।”
वन, कृषि और सहकारिता विभाग में असीम संभावनाएं
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि “वन, कृषि और सहकारिता विभागों के अंतर्गत प्रचुर मात्रा में कार्बन क्रेडिट अर्जित करने की संभावनाएं हैं। सहकारिता विभाग को निर्देशित किया गया कि वह अपनी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को भी इसमें सम्मिलित करें।”
ग्रीन क्रेडिट पर भी जोर
मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देश दिए कि वह कार्बन क्रेडिट के साथ-साथ ग्रीन क्रेडिट की दिशा में भी शीघ्र कार्य आरंभ करे। साथ ही, कृषि एवं दुग्ध विकास विभागों को भी इस दिशा में योजनाएं बनाकर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
स्थानीय समुदायों और युवाओं को मिलेगा लाभ
मुख्य सचिव ने कहा “इस पहल से स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ेगी, जैव विविधता की रक्षा होगी और सतत जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त होगा।”
बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी
इस बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, विनोद कुमार सुमन, सी. रविशंकर, श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव विनीत कुमार एवं हिमांशु खुराना, नाबार्ड के प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।