उत्तराखंडक्राइम

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, एसटीएफ ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

विदेश में बैठे मास्टरमाइंड लविश चौधरी के नेटवर्क का खुलासा, BotBro और BotAlpha समेत कई फर्जी कंपनियों के जरिए निवेशकों को बनाया जा रहा था निशाना

कविता परमार की रोबो आईडी से जुड़े थे 10 से 15 हजार लोग, कंपनी के खर्च पर कर चुकी थी 12 से 13 विदेश यात्राएं

देहरादून। उत्तराखंड में ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नवीन सिंह नेगी निवासी रुद्रप्रयाग और कविता परमार निवासी बालावाला, देहरादून के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि विदेश में बैठा मुख्य आरोपी लविश चौधरी BotBro, BotAlpha, Cross Market, Mine Crypto, Meta Trade 5, Financial Freedom और TLC Coin जैसी ऑनलाइन कंपनियों के माध्यम से निवेश का जाल चला रहा था।

एसटीएफ के मुताबिक, इन कंपनियों के जरिए लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा कमाने, निवेश की रकम बढ़ाने और विदेश यात्राओं का लालच दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) में पंजीकृत नहीं थीं। इसके बावजूद लोगों से निवेश के नाम पर बड़ी रकम जुटाई जा रही थी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ के अधीन विशेष अन्वेषण दल (SIT) का गठन किया था। पुलिस महानिरीक्षक नीलेश आनंद भरणे की निगरानी में गठित टीम विभिन्न जिलों में दर्ज मुकदमों की एकीकृत जांच कर रही है। एसआईटी ने शिकायतकर्ताओं के बयान, बैंक खातों के स्टेटमेंट और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद दोनों आरोपियों की भूमिका सामने आने पर उन्हें गिरफ्तार किया।

2022 से निवेश नेटवर्क से जुड़ा था नवीन सिंह नेगी

जांच में सामने आया कि नवीन सिंह नेगी वर्ष 2022 से QFX कंपनी से जुड़ा हुआ था। शुरुआत में वह स्वयं निवेश कर लाभ प्राप्त कर रहा था। बाद में विदेश में बैठे मुख्य आरोपी लविश चौधरी द्वारा संचालित BotBro और BotAlpha जैसी कंपनियों के माध्यम से अन्य लोगों को भी निवेश के लिए प्रेरित करने लगा। एसटीएफ के अनुसार, नवीन कंपनी में किंग लेवल की पोजीशन वाला पोर्टफोलियो धारक था।

एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि BotBro कंपनी बंद होने और उसके खिलाफ विभिन्न मुकदमे दर्ज होने के बावजूद नवीन सिंह नेगी ने RISENWAYS नाम से नई कंपनी का प्रचार शुरू कर दिया था। इसके लिए Zoom Meeting के माध्यम से लोगों को दोबारा ऑनलाइन बिजनेस से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा संख्या 053/2026 के तहत बीएनएस और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं तथा BUDS Act के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

कविता परमार के नेटवर्क में 10 से 15 हजार लोग जुड़े होने का दावा

मामले में गिरफ्तार दूसरी आरोपी कविता परमार से पूछताछ में भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। एसटीएफ के अनुसार, कविता वर्ष 2022 से QFX कंपनी से जुड़ी थी। उसने स्वयं और अपने परिजनों के नाम से आईडी बनाकर निवेश किया तथा अपनी रेफरल आईडी के जरिए अन्य लोगों को जोड़कर बड़ा नेटवर्क तैयार किया।

जांच में उसकी रोबो आईडी से करीब 10 से 15 हजार लोगों के जुड़े होने की जानकारी मिली है। वह कंपनी में सीनियर ईगल एग्जीक्यूटिव के पद तक पहुंच गई थी। पूछताछ में उसने कंपनी से प्रतिमाह लगभग 1,000 डॉलर का लाभ मिलने की बात बताई है।

एसटीएफ के मुताबिक, कविता वर्ष 2023 से 2026 के बीच कंपनी के सेमिनार में शामिल होने के लिए मलेशिया, थाईलैंड, दुबई और वियतनाम की करीब 12 से 13 यात्राएं कर चुकी थी। इन यात्राओं के आने-जाने, रहने और खाने का खर्च कंपनी की ओर से उठाया जाता था। वह देहरादून सहित उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में कंपनी का प्रचार करती थी। इसके लिए Zoom Meeting और WhatsApp ग्रुप का इस्तेमाल किया जाता था। ऑनलाइन बैठकों में एक समय पर करीब एक हजार लोग जुड़ते थे।

निवेश के बदले खातों में दिखाई जाती थीं डॉलर की संख्याएं

पूछताछ में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। एसटीएफ के अनुसार, कविता ने बताया कि निवेशकों द्वारा कंपनी के बैंक खातों में जमा कराई गई रकम के बदले उनके ऑनलाइन खातों में डॉलर के रूप में कुछ संख्याएं प्रदर्शित की जाती थीं। हालांकि, ये संख्याएं वास्तविक धनराशि नहीं होती थीं। पुलिस इस पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली और निवेशकों से जुटाई गई रकम के वास्तविक लेन-देन की जांच कर रही है।

दो मोबाइल फोन बरामद, विदेश में बैठे मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच जारी

कार्रवाई के दौरान एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से एक विवो और एक ओप्पो मोबाइल फोन बरामद किया है। पुलिस को इन मोबाइल फोन में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, बैंकिंग विवरण, WhatsApp चैट, ट्रेडिंग खातों और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की संभावना है। जांच टीम इनकी तकनीकी जांच कर रही है।

फिलहाल एसटीएफ निवेशकों से प्राप्त धनराशि के स्रोत और गंतव्य, विभिन्न बैंक खातों, नकद लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी और डॉलर के माध्यम से हुए लेन-देन की पड़ताल कर रही है। साथ ही विदेश में बैठे मुख्य आरोपी लविश चौधरी और उसके अन्य सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर अत्यधिक मुनाफे, विदेश यात्रा या कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देने वाली अनधिकृत कंपनियों के झांसे में न आएं। निवेश करने से पहले कंपनी की वैधानिकता और संबंधित नियामक संस्थाओं में उसके पंजीकरण की जांच अवश्य करें।

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