
देहरादून, 6 अगस्त 2025 — सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने आज देहरादून स्थित कैम्प कार्यालय में एक भावुक अवसर पर मृतक उपनल कर्मचारी धनवीर सिंह नेगी के पिता बलवीर सिंह नेगी और पत्नी मंगीता नेगी को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। यह सहायता उपनल और पंजाब नेशनल बैंक के बीच हुए करार के तहत दी गई।
प्राकृतिक आपदा में दिवंगतजनों को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत में धराली क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। मंत्री गणेश जोशी ने सभी घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
मंत्री जोशी ने कहा, “हम किसी को खोने के दुःख को तो कम नहीं कर सकते, लेकिन उनके परिवार की सहायता कर सकते हैं ताकि जीवनयापन में कठिनाई न हो।” उन्होंने बताया कि यह 50 लाख रुपये का पहला चेक पंजाब नेशनल बैंक से अनुबंध के तहत प्राप्त हुआ है, और इसे स्वर्गीय धनवीर सिंह की पत्नी को सौंपा गया है।
पूर्व में मिल चुकी है अन्य आर्थिक सहायता
₹1.5 लाख की राशि पहले ही उपनल द्वारा दी जा चुकी है।
EPF के माध्यम से मासिक पेंशन देने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
कर्मकार प्रतिकर योजना के तहत लगभग ₹10 लाख की अतिरिक्त सहायता के लिए भी पत्राचार जारी है।
सेवा के दौरान हुई थी दुर्घटना
स्वर्गीय धनवीर सिंह नेगी, विद्युत विभाग के बड़कोट, उत्तरकाशी स्थित विद्युत वितरण खंड में टीजी-दो के पद पर 28 मई 2015 से उपनल के माध्यम से कार्यरत थे। 17 अप्रैल 2025 को क्षेत्र में बाधित विद्युत आपूर्ति को दुरुस्त करते समय वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
कार्यक्रम में ये प्रमुख लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर कार्यक्रम में परिजनों सहित कई गणमान्य अधिकारी व भूतपूर्व सैनिक भी मौजूद रहे उपनल चेयरमैन मेजर जनरल (सेनि) सम्मी सभरवाल, उपनल प्रबंध निदेशक ब्रिगेडियर (सेनि) जेएनएस बिष्ट, सैनिक कल्याण निदेशक ब्रिगेडियर (सेनि) अमृतलाल , पंजाब नेशनल बैंक क्षेत्रीय प्रबंधक अनुपम, एजीएम अजीत उपाध्याय , डीजीएम उपनल राजेश नेगी, पीबीओआर के केंद्रीय अध्यक्ष शमशेर सिंह बिष्ट , मृतक के पिता बलवीर सिंह नेगी, पत्नी मंगीता नेगी, पुत्र आयुष नेगी.
सरकार और उपनल की इस पहल ने यह साबित किया कि कर्मचारियों की सेवा का सम्मान और उनके परिवार की देखभाल सरकार की प्राथमिकता है। धनवीर सिंह नेगी के प्रति यह श्रद्धांजलि उनकी निष्ठा और बलिदान की सच्ची पहचान है।