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उत्तराखंड में प्रधानाचार्य पद पर भर्ती का रास्ता साफ: 1385 में से 1180 पद खाली, नियमावली में संशोधन को कैबिनेट से मंजूरी, सीमित विभागीय परीक्षा से होगी भर्ती

उत्तराखंड के स्कूलों में प्रधानाचार्य पद की भारी कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को उत्तराखण्ड राज्य शैक्षिक (अध्यापन संवर्ग) राजपत्रित सेवा नियमावली-2022 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से लंबे समय से खाली चल रहे प्रधानाचार्य पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।

वर्तमान स्थिति:
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1385 स्वीकृत पदों में से केवल 205 पदों पर प्रधानाचार्य तैनात हैं, जबकि 1180 पद रिक्त हैं। इस कारण कई स्कूलों का प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा था।

क्या हुआ है संशोधन में:
शिक्षा विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के तहत नियमावली के तीन अहम नियमों में बदलाव किया गया है:

  • नियम 5: भर्ती का स्रोत

  • नियम 6: आयु सीमा

  • नियम 8: अनिवार्य शैक्षिक/प्रशिक्षण योग्यता

इन संशोधनों को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।

कौन होंगे पात्र?

नए संशोधित नियमों के अनुसार निम्नलिखित शिक्षक प्रधानाचार्य पद की सीमित विभागीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं:

  • प्रधानाध्यापक जिनकी सेवा 2 वर्ष पूर्ण हो गई हो

  • मौलिक रूप से नियुक्त प्रवक्ता, जिन्होंने कम से कम 10 वर्ष की सेवा की हो

  • प्रवक्ता पद पर पदोन्नत सहायक अध्यापक (एलटी), जिन्होंने प्रवक्ता के रूप में 10 वर्ष की सेवा पूर्ण की हो

  • संयुक्त रूप से 15 वर्ष की सेवा (प्रवक्ता + एलटी) वाले शिक्षक

  • मौलिक रूप से नियुक्त एलटी शिक्षक, जिन्होंने 15 साल की संतोषजनक सेवा दी हो

इसके अलावा, नॉन-बीएड प्रवक्ता भी पहली बार सीमित विभागीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

आयु सीमा में छूट:

अब सीमित विभागीय परीक्षा में शामिल होने की अधिकतम आयु सीमा 50 से बढ़ाकर 55 वर्ष कर दी गई है। यह आयु 1 जुलाई को गणना की जाएगी, जिस वर्ष भर्ती का विज्ञापन जारी होगा।

क्या है आगे की राह?

इस निर्णय से यह उम्मीद बंधी है कि प्रधानाचार्य के 1180 रिक्त पदों पर जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। इससे प्रदेश के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित होगी।

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