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2025 चातुर्मास के अंतर्गत छह साल की अतीत की स्मृति वर्तमान का उत्सव

2025 चातुर्मास के अंतर्गत छह साल की अतीत की स्मृति वर्तमान का उत्सवः

देहरादून। संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य 108 सौरभ सागर महामुनिराज के मंगल सानिध्य में जैन धर्मशाला में सुंदर संगीतमय कल्याण मंदिर विधान तीस जुलाई तक निरंतर चलेगा विधान मे उपस्थित भक्त बड़े हर्षोल्लास के साथ 23वें तीर्थंकर चिंतामणि भगवान पाश्र्वनाथ की आराधना कर रहे है।

इस अवसर पर आज के विधान के पुण्यार्जक जैन मिलन पद्मावती एवं पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर क्लेमेनटाउन रहे।
इस अवसर पर आचार्यश्री के पास बाहर से पधारे गुरुभक्तों का पुष्प वर्षायोग समिति द्वारा स्वागत अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर भगवान पाश्र्वनाथ की भक्ति आराधना के आठवे दिन 108 आचार्यश्री सौरभ सागर ने कहा कि जीवन का प्रारम्भ हो या अंत हो भगवान का नाम लेना अवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चा जन्म ले, स्कूल जाये तब भी भगवान् का नाम लेता है जब दुकान व्यापार खोलते है, विवाह शादी करते है, नई गाडी खरीदते है तब भी भगवान् का नाम लिया जाता है।

उन्होंने कहा कि गर्भ क्रिया से लेकर मृत्यु क्रिया पर्यन्त इंसान कहीं न कहीं भगवान को अपने साथ रखता है और शास्त्रकार कहते है कि जो अपने साथ भगवान को रखते है वही भाग्यवान होता है और जो भगवान को भूल जाते है उनका भाग्य भी उससे रुठने लग जाता है। उन्होंने कहा कि आज भले ही दिखाई न पड़े लेकिन समय उसे उसकी हैसियत अपने आप ही बता देता है।

उन्होंने कहा कि पाश्र्वनाथ भगवान के पास भी ऐसा ही था जब कर्मठ भगवान का ध्यान नहीं रख रहा था लेकिन भगवान पाश्र्वनाथ उसका बराबर ध्यान रख रहे थे। उनका कहना है कि कर्मठ उनसे बैर निकलने कि चेष्ठा रखता लेकिन भगवान पाश्र्व नाथ उसके बार बार क्षमा करते रहते। उन्होंने कहा कि बिच्छू कभी अपना स्वभाव नही छोड़ता लेकिन इसका ये मतलब नही वह बुरा है।

उन्होंने कहा कि कभी कभी उसके डंक से भी रोग निवारण का जहर निकलता है। उनका कहना है कि बस अनुसंधान करने वाले के भीतर कला होती है कि उस जहर को भी औषधि में बदल दे। उनका कहना है कि भगवान पारसनाथ के पास भी वह कला थी जो कर्मठ के जहर को औषधि के रूप में बदल रहे थे।

इस अवसर पर जैन समाज की मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन व अमित जैन ने कहा कि वर्षा योग की अमृतमयी वर्षा में सभी भक्तजन पुण्यार्जन करते हैं लाभ उठाते हैं। इस अवसर पर जैन समाज के अनेक पदाधिकारी व श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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